-37°C की हाड़ कँपाने वाली ठंड में चीन का नया कारनामा: बना डाला अनोखा सौर ऊर्जा प्लांट

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अक्सर माना जाता है कि सौर ऊर्जा (Solar Energy) का उत्पादन केवल गर्म और तेज धूप वाले इलाकों में ही बेहतर तरीके से हो सकता है। लेकिन चीन ने इस धारणा को बदलते हुए एक ऐतिहासिक तकनीकी सफलता हासिल की है। चीन ने अपने उत्तर-पूर्वी हिस्से में बेहद ठंडी और प्रतिकूल जलवायु वाले क्षेत्र में पहला सौर तापीय ऊर्जा संयंत्र (Solar Thermal Power Plant) सफलतापूर्वक शुरू कर दिया है।

यह पावर प्लांट जिलिन प्रांत के दाआन शहर में स्थित है, जिसने -37.3 डिग्री सेल्सियस के अत्यधिक कम तापमान और बर्फीले तूफानों जैसी गंभीर चुनौतियों को मात देकर काम करना शुरू किया है।

1. 100 मेगावाट की क्षमता और ‘पिघले नमक’ की जादुई तकनीक

100 मेगावाट (MW) की क्षमता वाला यह पावर प्लांट दुनिया भर के ठंडे और पहाड़ी क्षेत्रों के लिए एक मिसाल बनने जा रहा है। इस प्लांट की सबसे बड़ी खासियत इसकी पिघले हुए नमक (Molten Salt) की थर्मल स्टोरेज टेक्नोलॉजी है।

  • दिन-रात बिजली उत्पादन: आमतौर पर सोलर प्लांट सिर्फ धूप रहने तक बिजली बनाते हैं, लेकिन यह तकनीक सूरज की गर्मी को स्टोर कर लेती है।
  • 565°C तक हीटिंग: प्लांट में लगे विशेष दर्पण सूर्य की किरणों को एक जगह केंद्रित करते हैं, जिससे पिघला हुआ नमक 565 डिग्री सेल्सियस तक गर्म हो जाता है। इस हीट को स्टोर करके रात के समय या बादल होने पर भी लगातार बिजली बनाई जा सकती है।

2. 19 हजार से ज्यादा जादुई दर्पणों का इस्तेमाल

इस पूरे प्रोजेक्ट का स्केल बेहद विशाल है। इंजीनियरिंग और सटीकता के मामले में यह प्लांट बेजोड़ है:

  • इस पावर प्लांट में 19,667 हाई-प्रिसिजन रिफ्लेक्टिंग मिरर (दर्पण) लगाए गए हैं।
  • इन सभी दर्पणों का कुल क्षेत्रफल लगभग 5,90,000 वर्ग मीटर है, जो लगातार सूरज की दिशा के साथ घूमते रहते हैं।
  • ये दर्पण धूप को रिफ्लेक्ट करके 210 मीटर ऊंचे सेंट्रल टॉवर पर भेजते हैं, जहाँ हीट को इकट्ठा किया जाता है। निर्माण के दौरान सटीकता का आलम यह था कि 189 मीटर ऊँचे टॉवर को खड़ा करते समय वर्टिकल एरर (झुकाव की गलती) 10 मिमी से भी कम रही।

3. -37°C का तापमान और खतरनाक हवाएं: कैसे मिली कामयाबी ?

जिलिन में चाइना न्यूक्लियर पावर ग्रुप (CGN) के अधिकारियों के अनुसार, इस प्लांट को बनाना किसी चुनौती से कम नहीं था। यहाँ टीम को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा:

  • तापमान का -37.3 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाना।
  • कैटेगरी 9 की रफ्तार से चलने वाली विनाशकारी हवाएं।
  • अत्यधिक खारी-क्षारीय मिट्टी और जमीन के नीचे जमी हुई चिकनी मिट्टी।

इन मुश्किलों से निपटने के लिए चीनी इंजीनियरों ने विशेष रूप से एंटी-फ्रीज सिस्टम (पिघले नमक को जमने से रोकने के लिए), विंड-प्रूफ मिरर और कड़ाके की ठंड में काम करने वाली एडवांस कंक्रीट तकनीक विकसित की। यह तकनीक भविष्य में अन्य ठंडे देशों के लिए भी रास्ते खोलेगी।

4. पर्यावरण को फायदा: कोयले और कार्बन उत्सर्जन में भारी कटौती

यह पावर प्लांट न सिर्फ तकनीकी रूप से एडवांस है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी एक बड़ा वरदान साबित होगा:

  • सालाना उत्पादन: इस प्लांट से हर साल करीब 18 करोड़ (180 Million) किलोवाट-घंटे स्वच्छ बिजली पैदा होगी।
  • कोयले की बचत: इससे सालाना लगभग 54,000 टन मानक कोयले की खपत कम होगी।
  • प्रदूषण में कमी: यह प्रोजेक्ट हर साल वातावरण में जाने वाले 1,39,000 टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) के उत्सर्जन को रोकेगा।

निष्कर्ष (Conclusion)

चीन का यह दाआन सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट यह साबित करता है कि सही तकनीक और इच्छाशक्ति हो, तो प्रकृति की सबसे कठिन परिस्थितियों में भी ग्रीन एनर्जी (Green Energy) का उत्पादन किया जा सकता है। बर्फीले और ऊंचे अक्षांश वाले देशों के लिए यह प्रोजेक्ट क्लीन एनर्जी के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर साबित होगा।

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