हरिवंश राय बच्चन के 10 अनमोल विचार: जो निराशा के घोर अंधेरे में भी भर देंगे नई ऊर्जा

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हिंदी साहित्य के आकाश में डॉ. हरिवंश राय बच्चन एक ऐसे चमकते सितारे हैं, जिनकी कविताएं और विचार आज भी करोड़ों दिलों को प्रेरित करते हैं। आज की पीढ़ी भले ही उन्हें महानायक अमिताभ बच्चन के पिता के रूप में ज्यादा जानती हो, लेकिन एक दौर वह भी था जब बिग बी की पहचान ‘बच्चन साहब’ के बेटे के रूप में होती थी।

95 वर्ष के अपने जीवन में उन्होंने कड़े संघर्ष, उतार-चढ़ाव और सफलताओं को बहुत करीब से देखा। उनकी कालजयी रचना ‘मधुशाला’ ने उन्हें हमेशा के लिए अमर कर दिया। यदि आप भी जीवन में कभी निराश महसूस कर रहे हैं, तो बच्चन जी के ये 10 विचार आपके भीतर आगे बढ़ने का एक नया हौसला फूंक देंगे।

1. मन के हारे हार है, मन के जीते जीत

बच्चन जी का मानना था कि हर और जीत का फैसला मैदान में होने से पहले इंसान के दिमाग में होता है। अगर आपने मन से घुटने टेक दिए, तो साधन होने के बाद भी आप हार जाएंगे। लेकिन अगर मन में जीतने का संकल्प है, तो दुनिया की कोई ताकत आपको रोक नहीं सकती।

2. मन का हो तो अच्छा, न हो तो और भी अच्छा

यह जीवन का वह दर्शन है जिसे अमिताभ बच्चन अक्सर केबीसी (KBC) के मंच पर दोहराते हैं। इसका सीधा अर्थ है कि जब चीजें हमारी योजना के अनुसार होती हैं, तो अच्छा है। लेकिन जब वैसा नहीं होता जैसा हम चाहते हैं, तो निराश होने की जरूरत नहीं है; क्योंकि तब चीजें ईश्वर की मर्जी से हो रही होती हैं और वह हमेशा हमारे लिए बेहतर सोचता है।

3. जो बीत गई, सो बात गई

अतीत की असफलताओं या छूटे हुए अवसरों पर आंसू बहाने से वर्तमान और भविष्य दोनों बर्बाद हो जाते हैं। बच्चन जी अपनी इस पंक्ति के जरिए संदेश देते हैं कि जो समय हाथ से निकल गया, उसे भूलकर नए लक्ष्यों की ओर कदम बढ़ाना ही बुद्धिमानी है।

4. तू न थकेगा कभी, तू न रुकेगा कभी (अग्निपथ)

“कर शपथ, कर शपथ, अग्निपथ, अग्निपथ!” जीवन की राह कांटों भरी हो सकती है, चुनौतियां बड़ी हो सकती हैं। लेकिन एक सच्चे योद्धा का काम न तो थकना है, न रुकना है और न ही पीछे मुड़कर देखना है। बस निरंतर आगे बढ़ते जाना है।

5. संघर्ष का मैदान छोड़कर मत भागो तुम

साल 1976 में पद्म भूषण से सम्मानित बच्चन साहब का मानना था कि मुश्किलें देखकर पीठ दिखाना कायरता है। जीवन एक संघर्ष है और जो इस मैदान में डटकर मुकाबला करता है, सफलता अंत में उसी के कदम चूमती है।

एक जरूरी बात: अक्सर ‘कोशिश करने वालों की हार नहीं होती’ कविता को बच्चन जी की रचना मान लिया जाता है, लेकिन वास्तव में यह मशहूर कवि सोहनलाल द्विवेदी जी की कृति है, जिससे हरिवंश जी खुद भी बेहद प्रेरित थे।

6. ‘असंभव’ शब्द सिर्फ कायरों के लिए है

बच्चन जी कहते थे कि किसी भी काम को बिना पूरी कोशिश किए ‘असंभव’ मान लेना गलत है। असंभव शब्द का इस्तेमाल सिर्फ वो लोग करते हैं जो मेहनत करने से डरते हैं। दृढ़ निश्चय से हर नामुमकिन काम को मुमकिन बनाया जा सकता है।

7. अंधेरे से डरो मत, रोशनी वहीं से फूटेगी

बुरा वक्त, असफलताएं और जीवन के संकट हमें तोड़ने के लिए नहीं, बल्कि तराशने के लिए आते हैं। बच्चन जी के अनुसार, जब जीवन में सबसे घना अंधेरा (मुश्किलें) छा जाए, तो समझ लें कि सफलता की नई सुबह बेहद करीब है।

8. बिना हथौड़े की चोट के पत्थर भी भगवान नहीं बनता

“जिंदगी जीना आसान नहीं होता, बिना संघर्ष के कोई महान नहीं होता। जब तक न पड़े हथौड़े की चोट, पत्थर भी भगवान नहीं होता।” इन पंक्तियों के माध्यम से वे समझाते हैं कि यदि आपको जीवन में महान बनना है, तो संघर्षों की मार झेलनी ही पड़ेगी। बिना तपे सोना भी कुंदन नहीं बनता।

9. ख्वाबों को हकीकत में बदलने का साहस

बच्चन जी का एक और खूबसूरत विचार है— “आज अपने ख्वाब को मैं सच बनाना चाहता हूं, दूर की इस कल्पना के पास जाना चाहता हूं।” यह पंक्ति सिखाती है कि सिर्फ सपने देखना काफी नहीं है, बल्कि उन कल्पनाओं को हकीकत के धरातल पर उतारने के लिए कमर कसना जरूरी है।

10. सकारात्मकता ही असली ताकत है

बच्चन जी का पूरा जीवन और उनका साहित्य इस बात का गवाह है कि इंसान की असली पूंजी उसकी पॉजिटिव सोच और कभी न खत्म होने वाली ऊर्जा है। जब तक आप अंदर से सकारात्मक हैं, दुनिया की कोई भी विपत्ति आपको तोड़ नहीं सकती।

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