वियतनाम के गृह मंत्रालय ने बुजुर्गों को सामाजिक सुरक्षा का बड़ा फायदा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार वर्तमान ‘सामाजिक बीमा कानून’ के कई नियमों में संशोधन और बदलाव करने के एक नए मसौदे पर विचार कर रही है। इस नए प्रस्ताव के तहत, सामाजिक सेवानिवृत्ति लाभ (Social Retirement Benefits) पाने की उम्र सीमा को घटाकर 70 वर्ष करने का सुझाव दिया गया है।
क्या है नया प्रस्ताव और इसके विकल्प ?
फिलहाल वियतनाम के 2024 के सामाजिक बीमा कानून (अनुच्छेद 21) के अनुसार, सामान्य मामलों में सामाजिक सेवानिवृत्ति लाभ पाने की उम्र 75 वर्ष तय है। वहीं, गरीब और कमजोर परिवारों के बुजुर्गों के लिए यह सीमा 70 से 75 वर्ष के बीच है।
नए मसौदे (अनुच्छेद 21 के खंड 3) में सरकार के सामने मुख्य रूप से दो विकल्प रखे गए हैं:
- विकल्प 1: वर्तमान नियमों और उम्र सीमा को ही लागू रखा जाए (यदि देश का बजट तुरंत इस नीति का बोझ उठाने की स्थिति में न हो)।
- विकल्प 2 (नया प्रस्ताव): देश की आर्थिक स्थिति और सरकारी बजट की क्षमता के आधार पर, सेवानिवृत्ति लाभ की उम्र को धीरे-धीरे घटाकर 70 वर्ष या उससे भी कम कर दिया जाए। इससे सरकार को परिस्थितियों के अनुसार फैसले लेने में लचीलापन (Flexibility) मिलेगा।
उम्र सीमा घटाने की ज़रूरत क्यों पड़ी ?
गृह मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय के सामाजिक कल्याण विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार:
- लाभार्थियों में वृद्धि: जब पूर्व में सेवानिवृत्ति लाभ की आयु को 80 से घटाकर 75 वर्ष किया गया था, तब पेंशन और भत्ते पाने वाले बुजुर्गों की संख्या में करीब 5 लाख का इजाफा हुआ था। इसके चलते साल 2025 तक लाभार्थियों का प्रतिशत बढ़कर लगभग 42% हो गया था।
- लक्ष्य से अभी भी दूर: इसके बावजूद, यह आंकड़ा संकल्प संख्या 28-NQ/TW के तहत तय किए गए राष्ट्रीय लक्ष्य से काफी पीछे है। इस संकल्प का उद्देश्य साल 2030 तक देश के 60% बुजुर्गों को मासिक पेंशन या सामाजिक भत्तों के दायरे में लाना है।
- धीमी रफ्तार: वर्तमान में सामाजिक बीमा एजेंसी के माध्यम से पेंशन पाने वाले लोगों की संख्या में हर साल केवल 1 लाख की ही बढ़ोतरी हो रही है। अधिकारियों का मानना है कि यदि नियमों में यह नया बदलाव नहीं किया गया, तो सरकार के लिए 2030 तक तय लक्ष्य को हासिल करना बेहद मुश्किल होगा।
यह नया मसौदा कानून न केवल वियतनाम के बुजुर्गों को बुढ़ापे में वित्तीय सुरक्षा प्रदान करेगा, बल्कि देश के सामाजिक-आर्थिक विकास और न्यायपूर्ण समाज के निर्माण में भी एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।
