कम पानी में बंपर कमाई : ये हैं टॉप 5 फसलें और खेती का सबसे सफल मॉडल

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आज के समय में बदलते मौसम, कमजोर मानसून और पानी की कमी के कारण खेती करना किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पारंपरिक या अधिक पानी वाली फसलों पर निर्भर रहने के बजाय कम सिंचाई में तैयार होने वाली फसलों और मिक्स फार्मिंग (सहफसली खेती) को अपनाना चाहिए। इससे लागत कम होती है, जोखिम घटता है और मुनाफा बढ़ता है।

कम पानी में सबसे ज्यादा मुनाफा देने वाली टॉप 5 फसलें

अगर आपके क्षेत्र में पानी की कमी है या बारिश अनियमित होती है, तो आप इन 5 फसलों का चयन कर सकते हैं:

  1. बाजरा (Millet): कम बारिश वाले इलाकों के लिए बाजरा सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद फसल है। यह भीषण गर्मी और सूखे को आसानी से सहन कर सकती है।
  2. ज्वार (Sorghum): इस मोटे अनाज को बहुत कम सिंचाई की जरूरत होती है। बाजार में अनाज के साथ-साथ पशु चारे (कड़बी) के रूप में भी इसकी भारी मांग रहती है।
  3. मूंग (Green Gram): यह बहुत कम समय (कम अवधि) में पककर तैयार होने वाली दाल है। यह कम पानी में बेहतर उत्पादन तो देती ही है, साथ ही मिट्टी की सेहत भी सुधारती है।
  4. उड़द (Black Gram): कम लागत में बढ़िया मुनाफा देने वाली यह एक और प्रमुख दलहनी फसल है, जिसे बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है।
  5. अरहर (Pigeon Pea): अरहर के पौधे की जड़ें जमीन में काफी गहराई तक जाती हैं। इस वजह से यह जमीन के भीतर की नमी को सोख लेती है और सूखे के मौसम में भी इसकी शानदार पैदावार होती है।

कृषि वैज्ञानिकों की खास सलाह: बुवाई में न करें जल्दबाजी

अक्सर किसान पहली हल्की बारिश होते ही खेत में बीज बो देते हैं, जो कि गलत है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, जब तक आपके इलाके में कम से कम 75 से 100 मिलीमीटर (mm) बारिश न हो जाए और मिट्टी के अंदर अच्छी नमी न बन जाए, तब तक बुवाई शुरू नहीं करनी चाहिए। पर्याप्त नमी न होने पर बीज ठीक से अंकुरित नहीं हो पाते, जिससे दोबारा बुवाई का खर्च बढ़ जाता है।

जोखिम कम करने का अचूक तरीका: मिक्स फार्मिंग ( Intercropping )

जल संकट के इस दौर में मिक्स फार्मिंग (अंतर्वर्ती खेती) किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह है। इस तरीके में एक ही खेत के अंदर दो या दो से अधिक फसलों को निश्चित कतारों (Lines) में एक साथ उगाया जाता है।

  • उदाहरण: आप अरहर के साथ सोयाबीन उगा सकते हैं, या बाजरे के साथ मूंग लगा सकते हैं।
  • फायदा: यदि मौसम खराब होने के कारण कोई एक फसल बर्बाद भी हो जाए, तो दूसरी फसल से किसानों की लागत और कमाई सुरक्षित रहती है।

बाजरा और मूंग का सुपरहिट फॉर्मूला

कम पानी वाले क्षेत्रों में बाजरा और मूंग की मिश्रित खेती सबसे ज्यादा कामयाब मानी गई है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की रिपोर्ट के अनुसार:

  • खेत में 4 कतारें बाजरे की और 2 कतारें मूंग की (4:2 का अनुपात) रखनी चाहिए।
  • इस तरीके से खेती करने पर प्रति हेक्टेयर लगभग 15.79 क्विंटल तक का शानदार उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
  • बुवाई करते समय बाजरे की कतारों के बीच 45 से 60 सेंटीमीटर की दूरी रखें ताकि मूंग के पौधों को फैलने की जगह मिले।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल ( FAQs )

Q1. मिक्स फार्मिंग से मिट्टी को क्या फायदा होता है? मूंग और उड़द जैसी दलहनी फसलें हवा से नाइट्रोजन लेकर उसे मिट्टी में स्थिर (Fix) करती हैं। इससे जमीन की उपजाऊ शक्ति प्राकृतिक रूप से बढ़ जाती है और यूरिया जैसी खादों पर निर्भरता कम होती है।

Q2. सूखे के समय बाजरे की खेती क्यों फायदेमंद है? बाजरा एक मजबूत फसल है जो बेहद कम पानी में भी जीवित रह सकती है। सूखे के समय यह किसानों के लिए एक ‘बीमा फसल’ की तरह काम करती है और आय टूटने नहीं देती।

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