भारत-ऑस्ट्रेलिया यूरेनियम समझौता: वैश्विक संकटों के बीच ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम

0
2

वैश्विक मोर्चे पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और जलमार्गों (जैसे होर्मुज जलडमरूमध्य) में पैदा होने वाले संकटों के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कूटनीतिक और रणनीतिक कदम उठाया है। भारत और ऑस्ट्रेलिया ने यूरेनियम आपूर्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज द्वारा घोषित यह डील भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को एक नई गति प्रदान करेगी।

होर्मुज संकट और भारत की रणनीतिक तैयारी

हाल के समय में अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में उपजे संकट ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है।

  • कच्चे तेल की निर्भरता: दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल होर्मुज के रास्ते से ही गुजरता है, और भारत भी अपनी ईंधन जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करता है।
  • विकल्प की तलाश: इस मार्ग में व्यवधान आने से भारत में पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों पर सीधा असर पड़ता है। इसी अनिश्चितता से निपटने के लिए भारत अब पारंपरिक जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) के अलावा अन्य सुरक्षित विकल्पों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

इस समझौते से भारत को क्या लाभ होंगे?

ऑस्ट्रेलिया के पास दुनिया का सबसे बड़ा यूरेनियम भंडार मौजूद है। इस साझेदारी से भारत को निम्नलिखित फायदे मिलेंगे:

  • ईंधन की निर्बाध आपूर्ति: भारत के परमाणु बिजलीघरों (Nuclear Power Plants) को लंबे समय तक बिना किसी रुकावट के कच्चा माल (यूरेनियम) मिलता रहेगा।
  • परमाणु क्षमता में विस्तार: स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित होने से देश में परमाणु ऊर्जा उत्पादन की क्षमता को तेजी से बढ़ाया जा सकेगा।
  • दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा: हालांकि इस डील से पेट्रोल-डीजल की तात्कालिक निर्भरता तुरंत कम नहीं होगी, लेकिन भविष्य में यह देश को एक मजबूत और भरोसेमंद ऊर्जा विकल्प प्रदान करेगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here