मुख्य बिंदु:
- भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर ने लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर नया कीर्तिमान स्थापित किया।
- इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट मैच में 58 रनों की पारी खेलकर वह लॉर्ड्स पर तीनों फॉर्मेट में अर्धशतक लगाने वाली पहली भारतीय क्रिकेटर बनीं।
- पुरुष या महिला वर्ग में अब तक कोई भी भारतीय बल्लेबाज मक्का-ऑफ-क्रिकेट (लॉर्ड्स) पर यह कारनामा नहीं कर सका था।
भूमिका
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर ने क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले ‘लॉर्ड्स’ (Lords) के मैदान पर एक ऐसा ऐतिहासिक रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है, जो आज तक कोई भी भारतीय पुरुष या महिला क्रिकेटर नहीं कर पाया। इंग्लैंड के खिलाफ खेले जा रहे ऐतिहासिक टेस्ट मैच में हरमनप्रीत ने शानदार अर्धशतकीय पारी खेलकर दिग्गज बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे बड़े नामों को एक खास क्लब में पीछे छोड़ दिया है।
लॉर्ड्स पर ‘थ्री-ऑफ-द-बेस्ट’: तीनों फॉर्मेट में फिफ्टी
हरमनप्रीत कौर अब भारत की पहली ऐसी क्रिकेटर (पुरुष और महिला दोनों वर्गों में) बन गई हैं, जिन्होंने लॉर्ड्स के मैदान पर क्रिकेट के तीनों प्रारूपों—वनडे, टी20 और अब टेस्ट मैच—में अर्धशतक या उससे अधिक का स्कोर बनाया है।
इससे पहले वह इस मैदान पर सीमित ओवरों के क्रिकेट (वनडे और टी20) में हाफ सेंचुरी लगा चुकी थीं। अब इंग्लैंड के खिलाफ चल रहे इस ऐतिहासिक टेस्ट मैच की पहली पारी में 58 रन बनाते ही उन्होंने इतिहास के पन्नों में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों से दर्ज करा लिया।
संकट से उबारा और मंधाना के साथ की महत्वपूर्ण साझेदारी
मैच की बात करें तो भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही थी और टीम ने महज 101 रन पर अपने 3 महत्वपूर्ण विकेट गंवा दिए थे। ऐसे संकट के समय कप्तान हरमनप्रीत कौर ने क्रीज पर कदम रखा और उप-कप्तान स्मृति मंधाना के साथ मिलकर चौथे विकेट के लिए 89 रनों की बेशकीमती साझेदारी की।
हरमनप्रीत (58 रन), स्मृति मंधाना (83 रन) और ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा की शानदार पारियों की बदौलत भारतीय महिला टीम ने अपनी पहली पारी में 285 रनों का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया। जवाब में, पहले दिन का खेल खत्म होने तक इंग्लैंड ने 1 विकेट खोकर 21 रन बना लिए थे।
आंकड़ों में भारत का पलड़ा भारी
महिला टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में भारतीय टीम का पलड़ा इंग्लैंड पर हमेशा भारी रहा है। साल 1995 के बाद से ब्रिटिश टीम कभी भी भारतीय महिला टीम को टेस्ट प्रारूप में शिकस्त नहीं दे पाई है। इतिहास में यह एकमात्र मौका था जब इंग्लैंड को भारत के खिलाफ टेस्ट जीत नसीब हुई थी। हरमनप्रीत की इस कप्तानी पारी ने भारत को इस मैच में भी मजबूत स्थिति में ला खड़ा किया है।
