मुख्य बिंदु (Highlights):
- मेरठ की 20 वर्षीय दलित छात्रा ललिता गौतम की हत्या के बाद उत्तर प्रदेश का सियासी पारा चढ़ गया है।
- समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने दिल्ली में पीड़ित परिवार से मुलाकात कर आर्थिक मदद दी।
- बसपा सुप्रीमो मायावती ने अन्य दलों पर दिखावे की राजनीति का आरोप लगाया, जिसका बीजेपी नेता संगीत सोम ने समर्थन किया है।
- आगामी चुनावों को देखते हुए सूबे में दलित वोट बैंक को साधने के लिए राजनीतिक बिसात बिछनी शुरू हो गई है।
घटनाक्रम और बढ़ता सियासी पारा
उत्तर प्रदेश के मेरठ में 20 वर्षीय दलित छात्रा ललिता गौतम की निर्मम हत्या ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। हालांकि पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, लेकिन इस घटना को लेकर अब सूबे में बड़े पैमाने पर राजनीति शुरू हो गई है। उत्तर प्रदेश की सियासत में हमेशा से ही दलित वोट बैंक की भूमिका निर्णायक रही है, यही वजह है कि इस दुखद घटना के बाद तमाम राजनीतिक दल पीड़ित परिवार के साथ खड़े होने और अपनी पकड़ मजबूत करने की होड़ में लग गए हैं।
अखिलेश यादव का ‘PDA’ दांव और आर्थिक मदद
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाया है। उन्होंने ललिता के माता-पिता और भाई को दिल्ली स्थित अपने सरकारी आवास पर बुलाया, जहाँ करीब 1 घंटे 15 मिनट तक बंद कमरे में उनसे मुलाकात की।
- मुलाकात की कड़ियाँ: कैराना की सांसद इकरा हसन पीड़ित परिवार को लेकर दिल्ली पहुँची थीं।
- मदद और आश्वासन: अखिलेश यादव ने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया और 2 लाख रुपये का चेक सौंपा। उन्होंने न्याय का भरोसा देते हुए वादा किया कि भविष्य में सपा की सरकार बनने पर परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी। उन्होंने इस घटना को अपने ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले से जोड़ते हुए सरकार को घेरा।
मायावती का विरोधी दलों पर तीखा हमला
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने इस संवेदनशील माहौल के बीच सोशल मीडिया पर विपक्षी दलों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बसपा दूसरी पार्टियों की तरह राजनीतिक स्वार्थ साधने के लिए धरना-प्रदर्शन, तोड़फोड़ या खोखले वादे करके जनता को गुमराह नहीं करती।
“बसपा विरोधी दलों और उनके इशारे पर काम करने वाले संगठनों की तरह छलावे की राजनीति नहीं करती और न ही मगरमच्छ के आंसू बहाती है। हमारा मुख्य लक्ष्य बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर और मान्यवर कांशीराम के बताए रास्तों पर चलकर शोषितों का वास्तविक उत्थान करना है।” – मायावती, बसपा सुप्रीमो
बीजेपी नेता संगीत सोम का मायावती को समर्थन
इस पूरे विवाद में सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के फायरब्रांड नेता संगीत सोम ने मायावती के बयान का खुला समर्थन कर दिया। संगीत सोम ने कहा कि मायावती जी ने जो बातें कही हैं, वे पूरी तरह सच हैं और जनता को भ्रमित करने वाले दलालों से दूर रहना चाहिए।
इसके साथ ही संगीत सोम ने अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वे ‘सनातन समाज’ को जातियों में बांटने की राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि जनता अब इस विभाजनकारी नीति को समझ चुकी है और अखिलेश यादव अपने मंसूबों में कभी कामयाब नहीं होंगे।
राजनीतिक विश्लेषण: चुनाव से पहले ‘दलित’ वोट बैंक पर फोकस
हालांकि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों में अभी वक्त है, लेकिन सभी प्रमुख दलों ने अभी से अपनी गोटियां सेट करनी शुरू कर दी हैं। यूपी की सत्ता की चाबी काफी हद तक दलित मतदाताओं के हाथ में मानी जाती है।
- सपा इस वर्ग को अपने पाले में लाने के लिए ‘PDA’ का नारा बुलंद कर रही है।
- बसपा अपने पारंपरिक वोट बैंक को सहेजने के लिए अन्य दलों को ‘अवसरवादी’ साबित करने में जुटी है।
- भाजपा कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर मुस्तैद दिखते हुए विपक्ष के जातीय ध्रुवीकरण के प्रयासों को नाकाम करने की रणनीति पर काम कर रही है।
यही कारण है कि मेरठ की यह दुखद घटना इस समय उत्तर प्रदेश की राजनीति का केंद्र बिंदु बन गई है।
