केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर: DA मर्जर पर वित्त मंत्रालय का आया अंतिम फैसला, जानें सैलरी पर क्या पड़ेगा असर?

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8th Pay Commission & DA Merger Updates: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच लंबे समय से चल रही महंगाई भत्ते (DA) को मूल वेतन (Basic Pay) में मर्ज करने की चर्चाओं पर अब विराम लग गया है। कर्मचारी संगठनों की लगातार उठ रही मांगों के बीच केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने इस विषय पर अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। सरकार ने साफ कहा है कि फिलहाल महंगाई भत्ते को बेसिक सैलरी में मिलाने का कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

संसद में वित्त मंत्रालय ने दी सफाई

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने संसद में आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट किया है कि बढ़ती महंगाई और मूल्य वृद्धि से निपटने के लिए वर्तमान में लागू ‘डीए संशोधन प्रणाली’ (DA Revision System) ही प्रभावी रहेगी। सरकार की तरफ से अलग से किसी भी प्रकार के मर्जर (विलय) की तैयारी नहीं की जा रही है।

हालांकि, सरकार ने 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के लिए ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस’ (ToR) को नोटिफाई कर दिया है। वेतन आयोग के सदस्य इस समय विभिन्न राज्यों का दौरा करके कर्मचारी यूनियनों से सुझाव और फीडबैक ले रहे हैं। ऐसे में अब सैलरी स्ट्रक्चर में कोई भी बड़ा बदलाव सीधे 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद ही देखने को मिलेगा।

वर्तमान में कितना है महंगाई भत्ता (DA)?

महंगाई भत्ता कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बढ़ती महंगाई के असर से बचाने के लिए दिया जाता है। 7वें वेतन आयोग के नियमों के मुताबिक, ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (AICPI) के आंकड़ों के आधार पर साल में दो बार (जनवरी और जुलाई) डीए में संशोधन किया जाता है।

  • वर्तमान स्थिति: इस साल जनवरी में सरकार ने डीए में 2% की बढ़ोतरी की थी, जिसके बाद अब केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता बढ़कर बेसिक सैलरी का 60% हो चुका है।

कर्मचारी क्यों कर रहे हैं डीए मर्ज करने की मांग?

5वें वेतन आयोग ने सिफारिश की थी कि जब भी महंगाई भत्ता 50% की सीमा को पार कर जाए, तो उसे तुरंत मूल वेतन (Basic Pay) में मिला दिया जाना चाहिए ताकि कर्मचारियों की क्रय शक्ति (Purchasing Power) बनी रहे। चूंकि अब डीए 60% पर पहुंच चुका है, इसलिए कर्मचारी इसे मर्ज करने की मांग कर रहे हैं।

यदि सरकार डीए को बेसिक पे में मर्ज कर देती है, तो इसके कई बड़े फायदे होते हैं:

  • भत्तों में बंपर बढ़ोतरी: कर्मचारियों के अन्य सभी भत्ते जैसे- हाउस रेंट अलाउंस (HRA), चिल्ड्रेन एजुकेशन अलाउंस, ट्रांसपोर्ट अलाउंस और हॉस्टल सब्सिडी सीधे बेसिक सैलरी के प्रतिशत पर तय होते हैं। बेसिक पे बढ़ते ही ये सारे भत्ते खुद-ब-खुद बढ़ जाएंगे।
  • रिटायरमेंट बेनिफिट्स में लाभ: कर्मचारियों की ग्रैच्युटी (Gratuity) और लीव एनकैशमेंट (Leave Encashment) की गणना बेसिक सैलरी और डीए को मिलाकर की जाती है। मर्जर होने से रिटायर होने वाले कर्मचारियों के पीएफ, पेंशन और ग्रैच्युटी के फंड में लाखों रुपये का फायदा होगा।

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