नई दिल्ली: देश की सरकारी तेल कंपनियों (IOCL, HPCL, BPCL) ने आज घरेलू और कमर्शियल रसोई गैस सिलेंडरों की नई दरें अपडेट कर दी हैं। आज देशभर में एलपीजी (LPG) की कीमतों में कोई बदलाव नहीं देखा गया है और दरें पूरी तरह स्थिर बनी हुई हैं। हालांकि, वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी के बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले दिनों में तेल कंपनियां ईंधन के दामों की दोबारा समीक्षा कर सकती हैं।
उल्लेखनीय है कि बीते 1 जुलाई को कमर्शियल गैस सिलेंडर के दामों में ₹183.50 की बड़ी कटौती कर उपभोक्ताओं को राहत दी गई थी, जबकि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर की कीमतों में लंबे समय से कोई बदलाव नहीं हुआ है।
📊 महानगरों और प्रमुख शहरों में आज के LPG रेट
देश के अलग-अलग राज्यों में स्थानीय टैक्स (VAT) और परिवहन लागत के कारण एलपीजी के दाम भिन्न होते हैं। नीचे आज के ताजा भाव दिए गए हैं:
| शहर | घरेलू सिलेंडर (14.2 Kg) | कमर्शियल सिलेंडर (19 Kg) |
| दिल्ली | ₹942.0 | ₹2,930.0 |
| मुंबई | ₹941.5 | ₹2,885.5 |
| कोलकाता | ₹968.0 | ₹3,082.0 |
| चेन्नई | ₹957.5 | ₹3,106.0 |
| चंडीगढ़ | ₹951.5 | ₹2,954.5 |
| देहरादून | ₹961.0 | ₹2,983.5 |
| हैदराबाद | ₹934.0 | ₹2,052.5 |
| नोएडा / गाजियाबाद | ₹968.0 | ₹3,115.0 |
| तिरुवनंतपुरम | ₹939.5 | ₹2,930.0 |
📈 क्या आने वाले दिनों में महंगे होंगे गैस सिलेंडर?
वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर दिखने लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान संकट और युद्धविराम को लेकर दिए गए बयानों के बाद बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में करीब 6% का भारी उछाल दर्ज किया गया।
- क्रूड ऑयल की स्थिति: ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 5.2% बढ़कर 78.02 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई, जो कारोबार के दौरान एक समय 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को भी पार कर गई थी।
- भारत पर असर: भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल और एलपीजी आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा दबाव घरेलू तेल कंपनियों पर पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो 1 जुलाई को कमर्शियल गैस में दी गई ₹183.50 की राहत अगली समीक्षा में वापस ली जा सकती है। हालांकि, सरकार आम उपभोक्ताओं को महंगाई से बचाने के लिए घरेलू रसोई गैस (14.2 किलो) की कीमतों को स्थिर रखने की पूरी कोशिश करती है, लेकिन अंडर-रिकवरी (घटे मुनाफे) का दबाव बढ़ने पर मामूली बढ़ोतरी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
