वॉशिंगटन: एक तरफ जहां अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव चरम पर है, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दक्षिण एशिया के दो परमाणु शक्ति संपन्न देशों—भारत और पाकिस्तान—का जिक्र कर सुर्खियां बटोर ली हैं। ट्रंप ने दावा किया है कि उनके हस्तक्षेप के कारण ही दोनों पड़ोसियों के बीच एक विनाशकारी परमाणु युद्ध टल गया था, जिससे करोड़ों लोगों की जान बचाई जा सकी।
ब्रिटेन के आरएएफ मिल्डेनहॉल में ‘एयर फ़ोर्स वन’ विमान के भीतर पत्रकारों से चर्चा करते हुए ट्रंप ने वैश्विक संघर्षों को सुलझाने में अपनी भूमिका पर विस्तार से बात की।
📌 ‘अगर मैं न होता, तो परमाणु युद्ध में बदल जाती जंग’
न्यूज एजेंसी एएनआई (ANI) की रिपोर्ट के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप ने पुरानी घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच टकराव बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया था।
- ट्रंप का बयान: “दोनों देशों के बीच संघर्ष शुरू हुए एक सप्ताह बीत चुका था और लगभग 11 लड़ाकू विमान मार गिराए गए थे। स्थिति इतनी विस्फोटक थी कि यह गतिरोध किसी भी वक्त परमाणु युद्ध का रूप ले सकता था।”
- शहबाज शरीफ के बयान का हवाला: अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने खुद युद्ध रुकवाने के लिए उनकी प्रशंसा की थी। ट्रंप के मुताबिक, “पाकिस्तानी पीएम ने मुझसे कहा था कि राष्ट्रपति ट्रंप की वजह से 3 से 5 करोड़ (30 से 50 मिलियन) लोगों की जिंदगी बच गई, और वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं अधिक हो सकता था।”
💼 ‘टैरिफ’ की धमकी से रोके गए 8 वैश्विक युद्ध
अंतरराष्ट्रीय विवादों में अपनी मध्यस्थता का क्रेडिट लेते हुए ट्रंप ने अपनी कूटनीति का जमकर बख्यान किया। वेनेजुएला के राजनीतिक संकट और वहां की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा:
“मैंने अपने कार्यकाल और कूटनीति के जरिए अब तक 8 बड़े अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को सुलझाया है। इनमें से कम से कम 5 युद्धों को मैंने सिर्फ आर्थिक प्रतिबंधों और भारी टैरिफ (Tariff) लगाने की धमकी देकर रोक दिया था।”
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि उनके इसी संकट-प्रबंधन रिकॉर्ड को देखते हुए कई वैश्विक नेताओं का मानना है कि वे ‘नोबेल शांति पुरस्कार’ के सबसे बड़े हकदार हैं।
🔍 क्या था पूरा मामला? (पृष्ठभूमि)
गौरतलब है कि साल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक भीषण आतंकवादी हमले के जवाब में भारतीय सेना ने पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था। इसी सैन्य कार्रवाई के दौरान दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था।
- भारत का रुख: हालांकि डोनाल्ड ट्रंप लगातार दोनों देशों के बीच सीजफायर कराने का श्रेय लेते रहे हैं, लेकिन भारत सरकार ने हमेशा अपने आधिकारिक स्टैंड में किसी भी तीसरे देश की मध्यस्थता या अमेरिकी हस्तक्षेप के दावों को सिरे से खारिज किया है। नई दिल्ली का हमेशा से मानना रहा है कि पाकिस्तान के साथ सभी मुद्दे द्विपक्षीय हैं।
