महंगाई का झटका: जून में खुदरा महंगाई बढ़कर हुई 4.38%; जानें क्या हुआ महंगा और कहां मिली राहत

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मुख्य बातें (Highlights):

  • जून 2026 में खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation) बढ़कर 4.38% पर पहुंच गई, जो मई में 3.93% थी।
  • खाद्य महंगाई दर (Food Inflation) में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो मई के 4.78% से बढ़कर जून में 5.32% हो गई।
  • वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और मई में पेट्रोल-डीजल के दामों में हुई वृद्धि को महंगाई बढ़ने की मुख्य वजह माना जा रहा है।
  • जहाँ टमाटर और सोने-चांदी के दामों में थोड़ी नरमी आई है, वहीं अदरक जैसी रोजमर्रा की चीजें काफी महंगी हो गई हैं।

क्यों बढ़ी जून में महंगाई?

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल का असर अब घरेलू बाजार पर साफ दिखने लगा है। फरवरी से शुरू हुए वैश्विक तनाव के कारण मार्च के बाद से ही देश में महंगाई ने पैर पसारना शुरू कर दिया था।

मई के महीने में सरकार द्वारा पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों में की गई वृद्धि के कारण माल ढुलाई (Transportation Cost) का खर्च काफी बढ़ गया। इसी का नतीजा है कि जून के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़ों में महंगाई दर में उछाल देखने को मिला है। दूध से लेकर परिवहन तक, लगभग हर क्षेत्र पर इसका सीधा असर पड़ा है।

क्या हुआ महंगा? (कीमतों में उछाल)

ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते कई जरूरी सामानों की दरों में तेजी देखी गई है। नीचे दी गई तालिका में मई और जून के महंगाई आंकड़ों की तुलना की गई है:

सामग्रीमई की दर (%)जून की दर (%)स्थिति
अदरक32.50%50.41%बेहद महंगी हुई
चांदी की ज्वेलरी155.25%133.21%उच्च स्तर पर बनी हुई है
सोना और डायमंड40.91%36.82%कीमतों में तेजी बरकरार

कहां मिली राहत? (इन चीजों के दाम घटे)

महंगाई के इस दौर में राहत की बात यह है कि आलू, मटर जैसी कुछ बेहद जरूरी सब्जियों और वाहनों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे आम जनता को थोड़ी राहत मिली है:

सामग्रीमई की दर (%)जून की दर (%)स्थिति
टमाटर48.43%31.92%कीमतों में गिरावट
आलू-23.71%-20.34%दाम बेहद कम हुए
मटर-11.47%-9.67%सस्ता हुआ
जीरा-4.59%-3.75%कीमतों में कमी
मोटर कार / जीप-7.19%-6.89%ऑटो सेक्टर में राहत

आगे की राह

मई में ईंधन की कीमतों में जो बढ़ोतरी की गई थी, उसने जून के आंकड़ों को बुरी तरह प्रभावित किया है। अब बाजार विशेषज्ञों और आम जनता की नजरें जुलाई के महंगाई आंकड़ों पर टिकी हैं, जिससे यह साफ हो सकेगा कि आने वाले समय में महंगाई से राहत मिलेगी या जेब पर बोझ और बढ़ेगा।

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