राम मंदिर ट्रस्ट की अहम बैठक: जानें कितने हैं कुल सदस्य, किसके पास है वोटिंग राइट और चंपत राय के इस्तीफे पर कैसे होगा फैसला?

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Ram Mandir Trust Meeting Live Updates: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे की राशि में कथित गड़बड़ी का मामला इस समय देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस बीच, आज यानी सोमवार को ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे को लेकर अंतिम फैसला होना है।

इस बड़े घटनाक्रम के बीच आम लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि इस ट्रस्ट का पूरा गणित क्या है, कुल कितने मेंबर हैं और इस्तीफे पर फैसला किस प्रक्रिया के तहत लिया जाएगा।

राम मंदिर ट्रस्ट में कुल कितने सदस्य हैं? (Total Members)

‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ में कुल 15 सदस्य शामिल हैं। प्रशासनिक कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए इन्हें दो भागों में बांटा गया है:

  1. नियमित सदस्य (Regular Members): ट्रस्ट में कुल 11 नियमित सदस्य हैं। ये सभी संगठन के स्थायी सदस्य माने जाते हैं और नीतिगत फैसलों में इनकी भूमिका सबसे मुख्य होती है।
  2. पदेन सदस्य (Ex-officio Members): इनकी संख्या 4 है, जो प्रशासनिक पदों के आधार पर ट्रस्ट का हिस्सा बनते हैं।

इस अहम बैठक के लिए ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने सभी सदस्यों को मौजूद रहने का अनुरोध किया है। वरिष्ठ ट्रस्टी के. पारासरन के स्वास्थ्य कारणों के चलते वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ने की उम्मीद है।

किसके पास है वोटिंग का अधिकार? (Voting Rights)

ट्रस्ट के सभी 15 सदस्यों को मत (Vote) देने का अधिकार नहीं है। वोटिंग का अधिकार केवल 11 नियमित सदस्यों के पास ही है।

इसका सीधा मतलब यह हुआ कि चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर होगा या नहीं, इसका अंतिम फैसला इन 11 सदस्यों के बहुमत (Majority) के आधार पर ही किया जाएगा। पदेन सदस्य बैठक में अपनी सलाह और राय तो रख सकते हैं, लेकिन वे वोटिंग प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकते।

इस्तीफे को लेकर क्या है ट्रस्ट के भीतर का माहौल?

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे को लेकर ट्रस्ट के सदस्यों में दो अलग-अलग राय देखने को मिल रही हैं:

  • पहला पक्ष: कुछ सदस्यों का मानना है कि निष्पक्ष जांच के लिए दोनों पदाधिकारियों के इस्तीफे तुरंत स्वीकार कर लेने चाहिए।
  • दूसरा पक्ष: वहीं, कुछ सदस्यों का कहना है कि विशेष जांच दल (SIT) की अंतिम रिपोर्ट आने तक इंतजार किया जाना चाहिए।

संघ (RSS) की भी है पूरे मामले पर पैनी नजर

राम मंदिर से जुड़े इस विवाद पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) भी पूरी तरह सतर्क है। संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी सुरेश भैय्याजी जोशी को विशेष रूप से अयोध्या भेजा गया है, ताकि वे स्थिति पर नजर रख सकें। माना जा रहा है कि कर्नाटक के बेलगावी में होने वाली संघ की आगामी प्रांत प्रचारक बैठक में भी इस मुद्दे पर गहन चर्चा हो सकती है।

आज की बैठक से क्या बड़े नतीजे निकल सकते हैं?

सोमवार को होने वाली इस उच्च स्तरीय बैठक में मुख्य रूप से तीन संभावित रास्ते निकल सकते हैं:

  1. तत्काल इस्तीफा मंजूर: 11 नियमित सदस्यों के बहुमत से दोनों अधिकारियों का इस्तीफा स्वीकार कर लिया जाए।
  2. अंतरिम व्यवस्था: SIT की आधिकारिक रिपोर्ट आने तक किसी वरिष्ठ अधिकारी को अस्थाई तौर पर जिम्मेदारी सौंप दी जाए।
  3. नई प्रशासनिक टीम: मंदिर के दैनिक कामकाज और प्रबंधन को संभालने के लिए एक नए प्रशासनिक ढांचे का गठन किया जाए।

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