वॉशिंगटन/तेहरान: मध्य पूर्व (Middle East) में शांति की उम्मीदों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। अमेरिका और ईरान के बीच हुआ ऐतिहासिक शांति समझौता महज 22 दिनों के भीतर ही पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े रुख और दोनों देशों के बीच शुरू हुई नई सैन्य कार्रवाइयों ने पूरे खाड़ी क्षेत्र को युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।
तनाव इस कदर बढ़ चुका है कि ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) के आसपास दोनों देशों की सेनाएं एक बार फिर आमने-सामने हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी हड़कंप मच गया है।
💥 अमेरिकी एयरस्ट्राइक और ईरान का पलटवार
पिछले कुछ दिनों से शांत दिख रहे इस क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां अप्रत्याशित रूप से तेज हो गई हैं। अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अपनी तैनाती बढ़ा दी है।
- अमेरिका की कार्रवाई: दक्षिणी ईरान के तटीय इलाकों और द्वीपों—बंदर अब्बास, बुशहर, केशम और सिरिक—पर भारी अमेरिकी हमलों की खबरें हैं। बंदर अब्बास के शाहिद हक्कानी बंदरगाह से उठती आग की लपटें और धुआं दोनों देशों के बीच शुरू हुए सीधे टकराव की गवाही दे रहे हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस कार्रवाई में ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, कमांड नेटवर्क, तटीय रडार स्टेशनों और एंटी-शिप मिसाइल बेस को निशाना बनाया गया है।
- ईरान की जवाबी कार्रवाई: ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने भी शांत न बैठने का संकेत दिया है। ईरान का दावा है कि उसने बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाकर जवाबी हमले किए हैं। तेहरान ने चेतावनी दी है कि यदि क्षेत्र के अन्य देशों ने अमेरिका की मदद की, तो उनके ऊर्जा और सैन्य बुनियादी ढांचे भी सुरक्षित नहीं रहेंगे।
🤝 क्यों नाकाम हुई 22 दिन पुरानी डील?
तुर्की के अंकारा में आयोजित नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान इस संकट में आग में घी डालने जैसा साबित हुआ। ट्रंप ने दो टूक शब्दों में कहा कि ईरान के साथ हस्ताक्षरित समझौता अब पूरी तरह खत्म माना जाए।
डोनाल्ड ट्रंप का बयान: “मुझे ईरानी नेतृत्व पर बिल्कुल भरोसा नहीं है। कूटनीतिक मेज पर कुछ और कहा जाता है और दुनिया के सामने अलग बयान दिए जाते हैं। अमेरिका परमाणु कार्यक्रम पर एक ठोस और स्पष्ट समझौता चाहता था, जिससे ईरान बार-बार पीछे हट रहा है।”
गतिरोध के दो मुख्य कारण:
- परमाणु कार्यक्रम और शर्तें: वाशिंगटन चाहता था कि बातचीत पूरी तरह अमेरिकी शर्तों पर हो और ईरान परमाणु हथियार बनाने का विचार हमेशा के लिए छोड़ दे, जबकि तेहरान इसे अपनी संप्रभुता के खिलाफ मानता है।
- व्यापारिक जहाजों पर हमले: अमेरिका ने ईरान को तेल बेचने के लिए दिया गया अस्थायी लाइसेंस रद्द कर दिया है। अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से ओमान की ओर जा रहे तीन कमर्शियल जहाजों पर हमला कर समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया।
🗣️ ईरानी नेतृत्व का तीखा रुख
अमेरिकी कार्रवाई और प्रतिबंधों पर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि धमकी और कूटनीतिक धोखाधड़ी अमेरिका की पुरानी नीति रही है, लेकिन ईरान किसी भी दबाव के आगे घुटने नहीं टेकेगा और अपने अधिकारों की रक्षा करेगा। वहीं, ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने भी अमेरिका पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है।
यह सैन्य टकराव ऐसे समय में हुआ है जब ईरान में सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की अंतिम यात्रा में लाखों की भीड़ उमड़ी हुई थी। तेहरान का आरोप है कि अमेरिका ने जानबूझकर इस समय हमला किया ताकि दुनिया का ध्यान इस बड़े घटनाक्रम से भटकाया जा सके।
📉 वैश्विक अर्थव्यवस्था और शेयर बाजारों पर असर
इस नए सैन्य संकट का सीधा असर दुनिया भर के वित्तीय बाजारों और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है:
- क्रूड ऑयल में उछाल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेजी आई है और ब्रेंट क्रूड उछलकर $78 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है।
- शेयर बाजारों में गिरावट: वैश्विक बाजारों में आई अस्थिरता के कारण भारतीय शेयर बाजार भी अछूता नहीं रहा। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक (सेंसेक्स) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भारी बिकवाली के चलते लाल निशान पर बंद हुए।
